Friday, 6 May 2011

सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिकाओं के लिए नियम बनाने का आदेश दिया

 अदालत ब्लोग्पोस्त के लोकेश के अनुसार---
सुप्रीम कोर्ट ने अनुचित जनहित याचिकाओं (पीआईएल) के मद्देनजर एक उचित जनहित याचिका की पहचान करने के लिए उच्च न्यायालयों को आठ सूत्री व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही अदालत ने उत्तराखण्ड हाई कोर्ट में एक अनुचित जनहित याचिका दायर करने के लिए वहां के एक वकील पर एक लाख रूपए का जुर्माना कर दिया है। न्यायाधीश दलवीर भंडारी और न्यायाधीश मुकुंदकम शर्मा की पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को कहा है कि उचित और अनुचित पीआईएल में अंतर स्पष्ट करने के लिए उन्हें तीन महीनों के भीतर अपने नियम बना लेने चाहिए तथा अदालतों को उचित और प्रामाणिक पीआईएल को हर हाल में प्रोत्साहित करना चाहिए और उन पीआईएल को दरकिनार कर देना चाहिए जिन्हें अनुचित परिणामों के लिए दायर किया गया हो।

इसके साथ ही अदालत ने नैनीताल के वकील बलवंत सिंह चौफाल पर एक लाख रूपए का जुर्माना ठोक दिया। सिंह ने राज्य के महाधिवक्ता एल.पी.नैथानी की 2001 में की गई नियुक्ति पर सवाल खड़े करने की गुस्ताखी की थी। पीठ ने कहा कि जनहित याचिकाओं पर विचार करने के लिए हर न्यायाधीश अपनी व्यक्तिगत प्रक्रिया अपनाएं, इसके बदले उचित यह होगा कि हर हाई कोर्ट उचित पीआईएल को प्रोत्साहित करने तथा गलत इरादों से दायर की गई पीआईएल को दरकिनार करने के लिए ठीक से नियम बनाए।

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